वीरभद्र सिंह की आत्मा भी दुखी होगी, शिलाई कांग्रेस की हरकत से…

Local News SIRMOUR (सिरमौर) शिलाई हिमाचल

सिरमौर न्यूज़ / शिलाई

स्वर्गीय, राजा वीरभद्र सिंह ऊपर से भी देख रहे होंगे कि उनके सिपहसालारों के साथ क्या हो रहा है। उनकी आत्मा भी दुखी होगी। यह उद्गार प्रदेश कांग्रेस सचिव व पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष दिलीप चौहान के हैं। मीडिया के समक्ष दिलीप चौहान के मन टीस उजागर हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनकी आत्मा में बसी है। उनके निष्कासन की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी।
प्रदेश कांग्रेस सचिव दिलीप चौहान के इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं, क्या पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नहीं रहने के बाद उनके करीबी अब पार्टी में असहाय महसूस कर रहे हैं? वीरभद्र सिंह के करीबियों को यह लगने लगा है कि पार्टी में वीरभद्र विरोधी खेमा अब हावी होने लगा है? वीरभद्र सिंह खेमा हाशिए पर धकेला जा रहा है? दरअसल शिलाई मंडल कांग्रेसी ने वीरभद्र सिंह के करीबी दिलीप सिंह चौहान पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं और जनरल हाउस आयोजित कर उनके निष्कासन को लेकर प्रदेश आलाकमान को ऐसे समय में प्रस्ताव भेजा है, जब वीरभद्र सिंह के देहांत को कुछ अरसा ही हुआ है। शिलाई मंडल कांग्रेस की इस फैसले को विधायक हर्षवर्धन चौहान की पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ वैचारिक दूरियों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। मंडल कांग्रेस के इस फैसले को पार्टी के लिहाज से नुकसानदायक कदम माना जा रहा है। लादी क्षेत्र में कांग्रेस के क्षत्रप दलीप चौहान, दो बार पंचायत प्रधान, श्री रेणुका जी मंडल अध्यक्ष और सिरमौर जिला परिषद अध्यक्ष रह चुके हैं। क्षेत्र में उनका बड़ा जनाधार है।
मंडल से उनके निष्कासन की मांग को विधायक हर्षवर्धन से मनमुटाव के तौर पर भी देखा जा रहा है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए भी दलीप चौहान ने इस बात का जिक्र किया कि शिलाई क्षेत्र में एक व्यक्ति के इलावा कांग्रेस पार्टी टिकट के लिए कोई आवेदन नहीं करता। उन्होंने पिछली बार भी टिकट के लिए आवेदन किया था, इस बार भी करेंगे। ऐसे में शिलाई कांग्रेस के प्रस्ताव को विधायक हर्षवर्धन चौहान के रास्ते का रोड़ा हटाने के तौर पर भी देखा जा रहा है।
हालांकि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों को लेकर शिलाई कांग्रेस निश्चिंत है कि कार्रवाई होकर रहेगी।दूसरी ओर आरोपों पर दिलीप चौहान का कहना है कि वह किसी किस्म की पार्टी विरोधी गतिविधियां में शामिल नहीं रहे हैं। मंडल कांग्रेस को उनके निष्कासन का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निष्कासन होता है और उन्हें चुनाव प्रचार में नहीं लगाया जाता है, तो भी उनका वोट कांग्रेस को ही जाएगा। दिलीप चौहान ने निष्कासन की दशा में भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर भी विराम लगाया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में थे, कांग्रेस में हैं, और कांग्रेस में रहेंगे। वह भाजपा में शामिल नहीं होंगे।
कुल मिलाकर शिलाई कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असमंजस है। प्रदेश कांग्रेस आलाकमान ने दिलीप चौहान के निष्कासन पर कोई फैसला नहीं लिया है लिहाजा हर्षवर्धन चौहान के विरोधियों को भी हमला करने का मौका मिल रहा है। जबकि बिरोधी अंजाम पर नजरें गड़ाए बैठे हैं।