पंडित सुखराम परिवार कांग्रेस के खेमे में, आश्रय ने दिनभर किया प्रतिभा सिंह का प्रचार

हिमाचल

सिरमौर न्यूज़

पंडित सुखराम के पोते और अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा आखिरकार कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने निकल ही पड़े। अनिल शर्मा किस पार्टी में रहकर अपने राजनीतिक पारी आगे बढ़ाएंगे इन कयासों को भी विराम लग गया है। अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा ने प्रतिभा सिंह के पक्ष में प्रचार करने से साबित हो गया है कि पंडित परिवार कांग्रेस का दामन थाम कर राजनीतिक महत्वकांगशाओं को पंख लगाएगा।

पंडित सुखराम की राजनीतिक विरासत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते लगातार अस्थिरता का शिकार हो रही है। प्रदेश उपचुनाव की घोषणा के इतने दिनों बाद अब इस प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार ने अपने लिए राजनीतिक दल का चयन कर लिया है। दरअसल पंडित सुखराम परिवार बार बार यह बात कह रहा था कि वह किसी एक राजनीतिक पार्टी में रहकर अगली राजनीतिक पारी खेलेंगे। इस बीच पंडित सुखराम परिवार से किसी नेता के मंडी चुनाव में कूदने के भी कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि पंडित परिवार से कोई भी नेता चुनाव मैदान में नहीं उतरा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह बात चर्चा में थी कि आखिरी पंडित परिवार किस राजनीतिक दल का दामन थामेगा। बुधवार को आश्रय शर्मा ने प्रतिभा सिंह के प्रचार में उतर कर सभी कयासों को विराम लगा दिया। पंडित सुखराम परिवार किस राजनीतिक दल का दामन थामेंगे, यह चर्चा भी अब खत्म हो गई है। यह बात सच है कि राजनीति में कुछ भी बिना मतलब के नहीं होती लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि कांग्रेस और पंडित परिवार में किन किन शर्तों पर सहमति बनी है और कांग्रेस का दामन थामने के पीछे पंडित परिवार की आगामी रणनीति क्या है।

उधर कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह ने बड़ा बयान देकर पंडित परिवार के उनके पक्ष में आने को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि उनकी विधायक अनिल शर्मा से विस्तार से बात हुई है। अनिल शर्मा ने प्रतिभा सिंह को आश्वस्त किया है कि आश्रय शर्मा उनके लिए प्रचार करेंगे।अनिल शर्मा के आश्वासन के अनुरूप आश्रय शर्मा ने पूरा दिन प्रतिभा सिंह के लिए प्रचार भी किया। पंडित परिवार का कांग्रेस का दामन थामने के बाद मंडी में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यदि प्रतिभा सिंह चुनाव जीतती है तो पंडित परिवार कांग्रेस का दामन थाम कर आगामी राजनीति पारी खेल पाएगा लेकिन यदि प्रतिभा सिंह हार जाती है तो पंडित परिवार की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ना तय है।