12 घंटे तक नहीं किया पोस्टमार्टम, गुहार लगाते रहे परिजन

Local News SIRMOUR (सिरमौर) पॉवटा साहिब हिमाचल

सिरमौर न्यूज़

डॉक्टर नेताओं की आवभगत में मस्त, जनता त्रस्त

हमेशा सुर्खियों में रहने वाले पांवटा साहिब सिविल अस्पताल में लापरवाही का एक और मामला उजागर हुआ है। यहां एक मृतक के परिजनों को 12 घंटों तक शव मिलने का इंतजार करना पड़ा। बार बार गुहार लगाने के बाद भी शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ। पोस्टमार्टम नहीं होने का कारण डॉक्टरों का नेताओं की आवभगत में व्यस्त रहना बताया जा रहा है।

बताते चलें कि बीती शाम कंडेला गांव के एक युवक की संदिग्ध मौत हो गई थी। लिहाजा मृत युवक के शव का पोस्टमॉर्टम किया जाना था। वीरवार को मृतक के परिजन अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए गुहार लगाते रहे। मगर अस्पताल प्रशासन नेताओं की आवभगत में अपने दायित्वों को नजरअंदाज करता रहा। दरअसल अस्पताल में बने नए ऑक्सीजन प्लांट का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल उद्घाटन किया जाना था। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री सुखराम सहित स्थानीय नेता पहुंचे थे। नेताओं की आवभगत में सीएमओ सहित अस्पताल प्रशासन मृतक के परिजनों का दर्द ही भुला बैठा। मृतक के दर्जनों परिजन भूखे प्यासे अस्पताल और डेड हाउस के चक्कर काटते रहे, लेकिन गरीबों के दर्द से किसी का मन नहीं पसीजा। परिजन पोस्टमार्टम करवाने और शव उन्हें सौंपने की गुहार लगाते रहे, मगर समूचा स्वास्थ्य विभाग नेताओं की आवभगत में मशगूल रहा।

परिजनों ने मीडिया के समक्ष आरोप लगाए कि बार-बार विनती करने पर भी शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया। जबकि सुबह से पूरे गांव के सैंकड़ों लोग शव गांव पहुंचने और अंतिम संस्कार के इंतजार में भूखे प्यासे बैठे रहे। दूसरी तरफ डॉक्टर सहित पुलिस कर्मियों के समक्ष बार-बार गुहार लगाने पर पोस्टमार्टम की कार्यवाही नहीं की गई।

परिजनों ने बताया कि सीएमओ को शिकायत करने के बावजूद भी डॉक्टर मृतक का पोस्टमार्टम करने नही आए और परिजनों को 12 घंटों तक इंतजार करना पड़ा।
इस संबंध में पुरुवाला थाना प्रभारी विजय रघुवंशी ने बताया कि पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी। सुबह कागजी कार्रवाई करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर को सूचित कर दिया था। यदि पुलिस अधिकारी की बात सही है तो यह मामला सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का मामला है। मामला उजागर भी हो चुका है अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी, स्थानीय प्रशासन और ऊर्जा मंत्री इस लापरवाही पर क्या कार्यवाही करते हैं।

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