छात्रों का चरित्र निर्माण शिक्षक का सबसे बड़ा दायित्व, शिक्षक दिवस पर बोले राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ

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सिरमौर न्यूज़ / शिमला

शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर शिमला में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कहा प्रदेश में अच्छे शिक्षकों के वजह से शिक्षा का विकास हो रहा है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से ऊपर है। गुरुजन का बड़ा महत्व है। राज्यपाल ने कहा कि छात्रों का चरित्र निर्माण शिक्षकों का सर्वोपरि दायित्व होना चाहिए।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ ने कहा कि समाज को दिशा देने में शिक्षक की अहम भूमिका है। गुरु के आशीर्वाद के बिना जीवन में विकास संभव नहीं है। शिक्षकों पर हमारा विश्वास होता है शिक्षक व्यक्तित्व चरित्र निर्माण कर संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि आज समाज में चरित्र का अभाव है, इसलिए हम पीछे हैं। शिक्षकों पर सबसे बड़ा दायित्व छात्रों का चरित्र निर्माण करना है।

राज्यपाल ने सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों से कहा कि जब किसी को सम्मानित किया जाता है तो उसके बारे में अच्छा कहा जाता है। उन्हें सम्मानित होने के दौरान कही बातों पर खरा उतरना है। नई शिक्षा नीति से कई अहम बदलाव होंगे। हर शिक्षक विचार करे और संकल्प ले कि नई शिक्षा नीति को लागू करने में मेरी क्या भूमिका है। शिमला पीटरहॉफ होटल में आयोजित शिक्षक दिवस के अवसर पर 18 शिक्षकों को राज्‍यस्‍तरीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया।
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति से कई बदलाव किए जा रहे हैं। आज हर अभिभावक चाहता है कि उसके बच्चे को अच्छी गुणवत्ता युक्त शिक्षा मिले। हिमाचल कम साधनों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान पर है। इसका श्रेय अध्यापकों को जाता है। सुरेश भारद्वाज ने बताया कि गुरु के बिना तरकी नहीं। भगवान को प्राप्त करने का रास्ता गुरु से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सराहनीय कार्य किए। हिमाचल पहला राज्य जिसने आनलाइन शिक्षा शुरू की। अब सरकार घर घर तक मोबाइल देने जा रही है। ऐसे बच्चे जो स्मार्ट फोन ना होने के कारण आनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे, अब वह पढ़ाई कर सकेंगे।