क्या फिर से शुरू हो गया नगर परिषद में भ्रष्टाचार ?

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सिरमौर न्यूज़ / पांवटा साहिब

पांवटा नगर परिषद एक बार फिर से सोशल मीडिया की सुर्ख़ियों पर आ गयी है , शहर भर में नई नवेली नगर परिषद के चर्चे हो रहे है। भरष्टाचार को लेकर सवालों के घेरे में रही पूर्व नगर परिषद के बाद अब नई नवेली नगर परिषद भी सवालों के घेरे में आ गयी है। नगर परिषद पर लाखो रूपये का लोहा कोडियो के भाव बेच डालने के आरोप लग रहे है
बता दें की कांग्रेस कार्यकाल में बद्रीपुर से लेकर वाई प्वाइंट तक डिवाइडर लगाए गये थे ,पूर्व विधायक चौधरी किरनेश जंग के आग्रह पर स्थानीय सन फार्मा कम्पनी ने नगर की बेहतरी के लिये लाखो की लागत के लोहे के डिवाइडर डोनेट किये थे । इन दिनों नेशनल हाइवे को चौडा करने की मुहिम शुरू हुई तो डिवाइडर हटाऐ जाने लगे जिनको कि प्रथम चरण में ही नेशनल हाई वे अथारिटी हटा रही थी। दिन दिहाड़े ये डिवाइडर काट कर हटाए जा रहे थे तो मीडिया कर्मियो ने इस मामले को लेकर खबरे प्रकाशित /प्रसारित की जिसके बाद स्थानीय प्रशासन को दान में दी गयी चल सम्पत्ति पर प्रशासन की ओर से एसडीएम पांवटा सक्रिय हो गए जिन्होंने और आदेश जारी किये और ये सम्पति बच गयी । इतने में नेशनल हाई वे अथारिटी द्धारा लगाया गया ठैकेदार कटाई का काम छोड कर भाग गया और नेशनल हाईवे के अधिकारियो ने नगर पालिका को पत्र लिखकर सूचित कर दिया कि बीच में जो व्यवधान आ रहे है उनको हटाया जाय। बताया जा रहा है की बाद में लाखो रूपये का लोहा कोडियो के भाव बेच डाला गया। मामला सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ता दिखाई दिया।
नगर परिषद पांवटा साहिब के पूर्व पार्षद व समाज सेवी शिव सिंह असवाल ने इस बारे में फेसबुक पर पोस्ट अपडेट कर सवाल उठाए हैं कि “यक्षप्रश्न ? कि पाँवटा वाई प्वाइन्ट से बद्रीपुर तक डिबाइडर का लोहा बिकास की भेंट चढ गया ? या किसी के पेट मे समा गया ? पाचन को सलाम ?”
आरोप यह भी है की इस पूरे प्रकरण में नगर पालिका परिषद ने प्रॉपर तरीके से ना तो कोई टेण्डर किया ना ही किसी भी प्रकार का प्रचार प्रसार किया और ना ही खुली बोली लगवाई गयी। इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है , लोगो का कहना है की कहीं पूर्व परिषद की तरह वर्तमान नगर परिषद में भी भ्रष्टाचार पनपना शुरू तो नहीं हो गया ?

[ नगर परिषद नव निर्वाचित अध्यक्षा निर्मल कौर ने पूछे जाने पर बताया कि इस स्क्रैप को बेचे जाने की आवश्यक औपचारिकताऐं पूरी की जा रही हैं। वहीं कार्यकारी अधिकारी एसएस नेगी से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि ये डिवाइडर लोगों की जान के लिए आफत बने हुए थे। ऐसे में नगर परिषद को अधिकार है कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे हटाकर बेच दिया जाए ]