हिमुडा के अधिकारीयों से मानसिक रूप से परेशान हो चुका है दिव्यांग का परिवार

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सिरमौर न्यूज़ – पांवटा साहिब

विकलांगों के कल्याण के लिए और उनकी सहायता के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। दिव्यांग जनों के सरकारी दफ्तरों में काम जल्दी निपटा इसके लिए सरकार ने सख्त निर्देश भी दिए हैं। लेकिन सरकारी विभागों के अधिकारी शासन की व्यवस्थाओं को पलीता लगा रहे हैं। पांवटा साहिब निवासी विनय जैन अधिकारियों के मनमानी का शिकार हो रहे हैं। विनय जैन बीमारी के कारण ठीक से चल फिर भी नहीं सकते। बोलने में भी परेशानी है। उनकी पत्नी भी 70 फ़ीसदी विकलांग है। लेकिन शिमला हिमुडा के अधिकारी न उनके हालत हालात पर तरस खा रहे हैं ना सरकारी निर्देशों का पालन कर रहे हैं। दरअसल विनय जैन शिमला में उनके मकान को बेचना चाहते हैं। विनय जैन का मकान शिमला में हिमुडा कॉलोनी में बना है। लिहाजा मकान बेचने के लिए विनय जैन को हिमुडा से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद भी हिमुडा के अधिकारी उन्हें संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। और बार-बार कोई ना कोई अड़ंगा डाल रहे हैं। ऐसे में परेशान विनय जैन ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के नाम एक वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में विनय जैन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि उनके काम में सरकारी अड़ंगे को खत्म किया जाए।
कोरोना काल में पांवटा साहिब से शिमला तक का सफर करना और फिर वहां दिनभर सरकारी दफ्तरों में धक्के खाना, दिव्यांग विनय जैन के लिए बड़ी मुसीबत है। लेकिन मजबूरी में सभी काम करने पड़ रहे हैं। हालांकि विनय जैन और उनकी माता ने मकान बेचने संबंधित सभी सरकारी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली हैं। हिमुडा ने जो ऑब्जेक्शन लगाए थे उन्हें भी पूरा कर लिया है। लेकिन बावजूद इसके वही ऑब्जेक्शन दोबारा लगाया गया है। ऐसे में दिव्यांग परिवार सिस्टम पर सवाल उठा रहा है। विनय जैन और उनकी दिव्यांग पत्नी के समक्ष उनकी दिव्यांगता सबसे बड़ी समस्या है। उस पर संवेदनहीन सरकारी तंत्र की मार जीवन को कठिनाइयों में डाल रहा है। अपनी समस्याएं अलग है। पांवटा साहिब से शिमला का सफर और वहां दिनभर दफ्तरों में धक्के खाना इस परिवार के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। विनय जैन की पत्नी 70 फ़ीसदी दिव्यांग है। पति और सास जब शिमला के चक्कर काटते हैं तो दिव्यांग पत्नी के लिए डेढ़ साल की बच्ची को संभावना और घर के काम को निपटना बड़ी समस्या हो जाती है। दूसरी तरफ संवेदनहीन सरकारी तंत्र है जो सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद भी इनको मकान बेचने की इजाजत नहीं दे रहा है।