35-40 डिग्री गर्म तापमान में भी उगा दिए रसीले सेब

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सिरमौर न्यूज़/पांवटा साहिब

सेब के नाम से शिमला के लाल-लाल और कश्मीर के रसीले सेब का स्वाद का ख्याल दिमाग पर छा जाता है। जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के दूरदराज गांव शरली के किसान-बागवान ने परंपरागत खेती के अलावा 35-40 डिग्री गर्म तापमान में भी रसीले सेब उगाए हैं।

तीन साल की कड़ी मेहनत उपरांत एक दर्जन परिवारों ने लगभग एक हज़ार पौधों पर खूबसूरत और स्वादिष्ट सेब की फसल लहराई हैं। शरली के प्रगतिशील किसान-बागवानों ने कम ऊँचाई वाले मध्यम वातावरण में भी सेब की बम्पर फसल तैयार कर सबको चौंका दिया है। तीन साल की मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आने पर ग्रामीण बागवानों के चेहरों पर रौनक है।

बता दें कि समुद्र तल से लगभग चार हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित शरली गांव में इस बार स्पर वैराईटी के सेब की फसल तैयार हुई है। तीन साल के पौधों में बहुत अच्छा फल लगा है। एक और जहा तापमान गर्म रहता है वहीं गांव में सिंचाई का कोई साधन नहीं है फिर भी वर्षा पर आधारित खेतों में स्पर किस्मों में- रेड चीफ, सुपर चीफ, जेरोमाईन, स्कारलेट टू, गेलगाला, रैडलमगाला आदि किस्मों का सफल उत्पादन किया है।

बता दें कि सभी किस्मों के सेब में फलों का साईज और रंग बहुत अच्छा बना है। जून के अन्तिम सप्ताह तक फल तुड़ान के लिए तैयार हो जाएगा। बागवानों ने इसमें केंचुआ खाद का विशेष प्रयोग भी किया है।

प्रगतिशील किसान व समाजसेवी कुंदन सिंह शास्त्री ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शरली गांव में 20-22 लोगों ने प्रयोग के तौर पर UHF नौणी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर डॉ धर्मपाल शर्मा की तकनीकी सलाह से ये सफल प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में आसपास के गांवों में भी सेब की इन किस्मों को लगाने के लिए विशेषज्ञों तथा बागवानी विभाग के साथ मिलकर किसानों को जागरूक किया जाएगा।

सेब उत्पादक उपेंद्र सिंह, बहादुर सिंह, सुनील कुमार, जगदीश चौहान फौजी, ओम प्रकाश, ग्यार सिंह, मान सिंह, नाथूराम, उदय राम व कुंदन शास्त्री आदि का कहना है कि वर्षा पर आधारित इलाकों में बारिश के पानी का संग्रह करके टपक सिंचाई, बर्मी कम्पोस्ट, मिश्रित खेती आदि के द्वारा भी किसान अपनी आय को बढ़ाने में बागवानी, कृषि तथा पशुपालन के क्षेत्र में अनेक सफल प्रयास कर सकते हैं।