पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र के पझोता रासू मंदर के लोगो के प्रति चुने हुए प्रतिनिधियों  में दिखी संवेदनहीनता

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पवन तोमर / राजगढ़

समाजसेवी, राजनीतिक विचारक एवं विश्लेषक सुनील रोशन ने  पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र से चुने हुए प्रतिनिधियों और पूर्व प्रनिधियों पर पझोता रासुमंदर और पच्छाद के दुर्गम क्षेत्रों की जनता के प्रति संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा है की मौजूदा समय में जब विश्वव्यापी कोविड19 का कहर देश और प्रदेश झेल रहा है ऐसे स्थिति में जिन प्रतिनिधियों को चुनकर पच्छाद की जनता ने विधानसभा और लोकसभा में भेजा वे लोग इस मुसीबत की घड़ी में जनता से नदारद रहे है , खासकर पच्छाद के दुर्गम क्षेत्रो के लोगो से  सांसद सुरेश कश्यप व् नवनिर्वाचित विधयाक रीना कश्यप दोनों ने राजगढ़ और सरांहा को अपनी राजनीति का केंद्र बिंदु बनाया है बाकी इन लोगों ने पाझोता रासु मंदर और घिन्नी घाड़ क्षेत्र के लोगो से कोई संवाद या मिलने की कोशिश नहीं की और ना ही ये जानने की कोशिश की गई कोई गरीब परिवार किसी मुश्किल की स्थिति में तो नहीं है , लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही है कि नहीं किसानों को अपनी फसलों को मंडियों तक पहुंचाने में कोई दिक्कत तो नहीं हो रही और जो फसलें किसानों ने लगाई है जिनमें मुख्यता टमाटर, शिमला, मिर्च, बीन, आदि है क्या वे बड़ी मंडियों तक पहुंच पाएगी या उनके रेट मिलने की कोई संभावना है।फूल और गोभी उगाने वाले किसान जिन्हें अपनी लागत भी नहीं मिली वो ऐसी स्थिति में क्या करें क्षेत्र्वसियो का लाखो रुपयों का नुक्सान उठाना पड़ा लेकिन मजाल है की पच्छाद के दोनों चुने हुए नेताओ ने इस क्षेत्र की सुध ली हो । इस क्षेत्र के बागवान भी इसी असमंजस में है कि वो ऐसी स्थिति में क्या करे। ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि इस महामारी के दौर में भी जब इन लोगो की सुध किसी ने नहीं ली क्या इस क्षेत्र के लोग इन चुने हुए प्रतिनिधियों को क्या माफ कर पाएंगे? क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का कहना यह है की जब इन्हें वोट लेने होते है तो जनता जनार्धन के घर घर रात दिन वोट मांगने दोनों हाथ जोड़कर पहुच जाते है फिर इनके पास समय की कोई कमी नहीं होती लेकिन इस दोरान जब पूरा विश्व से कोरोना नामक भयंकार महामरी से झुझ रहा है इस मुसीबत की घड़ी में जब यह नेता काम नहीं आये तो इसके सिवा इनसे क्या उमीद कर सकते है | जब यह बात हम आम लोगो को समज आती है की इस मुसीबत की घड़ी में एक दुसरे लोगो का हाल जानना पड़ता है आपस में एक दुसरे की सहयता करनी पडती है लेकिन सोचने वाली बात यह होती है की इन चुने हुए नेताओ को यह बात समज में आती ही नहीं मतलब साफ़ है की जब इन्हें अपनी पेंशन लगानी होती है तो आम जनता के आगे पीछे दुम हिला कर घूमते नजर आते है और जब जनता मुसीबत में तो इनके पास समय नहीं | लोगो का कहना है की आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका परिणाम देखने लायक होगा |