108 में सफल प्रसव चिकित्सकों की क़ाबलियत पर उठा रहे कई सवाल

राजगढ़ हिमाचल

पवन तोमर – राजगढ़

प्रसव को लेकर स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत चिकित्सकों का तजुर्बा 108 एम्बुलेंस में सेवाएं देने वाले फार्मासिस्ट कर्मचारियों के सामने फीका पड़ने लगा है। जिला सिरमौर में कई बार खबरे अख़बारों की सुर्ख़ियों में रही है ” 108 एम्बुलेंस में फिर गूंजी किलकारी “
दरसल 108 एम्बुलेंस कर्मियों के सामने चिकित्सकों की डिग्रियां बोनी साबित होती जा रही है। चिकित्सकों की लापरवाही को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले सिविल अस्पताल राजगढ़ के चिकित्सकों की क़ाबलियत पर अब लोग शक करने लगे है। खासकर प्रसूति के समय सम्बंधित चिकित्सक पर भरोसा करना अब लोगो को बेमानी लग रहा है। ताजा मामला बीते रोज का है जब काबिल चिकित्सक ने एक गर्भवती महिला का प्रसव अस्पताल में करने से मना कर दिया जिसका कारण गर्भाशय में पल रहा बच्चा उल्टा होना बताया गया। महिला का प्रसव करवाने के लिए सीधे सोलन अस्पताल रेफर कर दिया गया। डरे सहमे परिजन महिला को 108 एम्बुलेंस की सहायता से सोलन अस्पताल की तरफ चल दिए लेकिन प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला की हालत हो देखते हुए 108 की टीम ने जटोली के समीप महिला का सफल प्रसव करवा दिया।
बताते चले की उपमंडल राजगढ़ के अंतर्गत 108 एम्बुलेंस के कर्मचारीयो द्वारा मंगलवार को एक महिला की सफलतापूर्वक नोर्मल डिलीवरी करवाई गई। 19 वर्षीय सरोज को कुपवी से हरिपुरधार और वहां से एम्बुलेंस में ही सोमवार की रात राजगढ़ अस्पताल लाया गया था लेकिन मंगलवार दोपहर लगभग डेढ़ बजे बच्चा उल्टा होने का हवाला देकर सरोज को सोलन अस्पताल रेफर कर दिया गया। सरोज के पति अमर सिंह ने बताया कि उन्हें यहाँ चिकित्सको ने उल्टा बच्चा होने की बात कह कर सोलन रेफर कर दिया था । अमर सिंह ने ईएमटी पुष्पलता का आभार भी जताया जिन्हने जटोली के समीप एम्बुलेंस में ही सफलतापुर्वक डिलीवरी करवा दी। ईएमटी पुष्पलता ने सम्पर्क करने पर सिरमौर न्यूज़ को बताया की बच्चे द्वारा माँ के पेट में पोटी करने की बात कह कर डिलीवरी केस रेफर किया गया था और महिला को यशवंतनगर से ही डिलीवरी के लक्ष्ण आरम्भ हो गये तथा जटोली के समीप नोर्मल डिलीवरी करवाई गयी।

गौरतलब है की यह पहला मौका नही है जब राजगढ़ से किसी रेफर केस की डिलीवरी 108 एम्बुलेंस में करवाई गयी हो। जहाँ 108 कर्मचारियों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है तो वहीँ दूसरी और यह बात राजगढ़ अस्पताल में कार्यरत चिकित्सको की काबलियत पर सवालिया निशान लगा रही है। जब एक डिप्लोमा होल्डर फार्मासिस्ट डिलीवरी करा सकता है तो एक क्वालिफाईड डाक्टर अस्पताल में डिलीवरी क्यों नहीं करा सकता? चिकित्सक क्यों अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए ऐसे मामलों को रेफर कर देते है और महिलाओं की जान को जोखिम में क्यूँ डाला जा रहा है। इस बारे जब जिला सिरमौर के सीएमओ के.के. पराशर से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और मामले की जाँच की जाएगी।