अनुसूचित जाति के लोगो को पीने के पानी के लिए करनी पड़ रही जद्दोजेहद

राजगढ़ हिमाचल

सिरमौर न्यूज़ – राजगढ़

इकसवी सदी में भी अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले परिवार को पीने के पानी के लिए जद्दोजेहद करनी पड़ रही है । लगभग 25 वर्षों से पीने के पानी के लिए स्वर्ण जाती के लोगो के आगे नतमस्तक होना पड़ रहा है । अपने बच्चों को पीने का पानी मुहैया करवाने के लिए परिवार आईपीएच विभाग के अधिकारियों से कई बार प्रार्थना कर चुके है लेकिन उन्हें सिवाए प्रताड़ना ओर झूठे आश्वासनों के कुछ भी हासिल नही हुआ । लेकिन एक सरकारी अफसर ने शिकायतकर्ता को ही पागल करार दे दिया।

मामला जिला सिरमौर के उप मंडल राजगढ़ की ग्राम पंचयात टिककर के गाँव का है जहां कुछ रसूखदार स्वर्ण जाती से सम्बन्ध रखने वाले परिवारों द्वारा अनुसूचित जाती के पांच परिवारों के साथ पीने के पानी को लेकर भेदभाव किया जा रहा है । टिककर गांव के निवासी रतन कुमार ,पवन कुमार ने बताया की उनका परिवार पिछले 25 वर्षो से पीने के पानी की समस्या को झेल रहा है , लेकिन विभाग द्वारा उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है |
शिकायतकर्ता पवन कुमार ने बताया की इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत टिककर के प्रधान ओम प्रकाश ठाकुर की अध्यक्षता और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ट अभियंता की उपस्थिति में गाँव के लोगों ने यह सहमति जताई थी कि जब तक स्त्रोत में पानी का स्तर बढ़ नही जाता है तब तक सभी लोग एक ही सार्वजानिक नल से पीने का पानी भरेगे, और जैसे ही स्त्रोत में पानी का स्तर बढ़ जायेगा पहले की तरह पानी सभी नलो मे चालु कर दिया जायेगा | इस बार बारिश के बाद उपरोक्त स्त्रोत पर जल स्तर बढ़ गया है लेकिन उसके बावजूद भी विभाग ने इन गरीब लोगों के घर के लिए पाइप लाइन नही जोड़ी जबकि अन्य सभी लोग पानी का भरपूर आनंद उठा रहे है। आरोप है की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और विभाग रोज इस परिवार के साथ टाल मटोल कर रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है की हर बार विभागीय अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है |

पीड़ित परिवार ने लगये भेदभाव व् दादागिरी के आरोप

गौरतलब है की गाँव में 12-14 स्वर्ण जाति परिवारों में से केवल चार-पांच परिवार अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखते है I विभाग ने 04-03-2017 मे जिस सार्वजानिक नलके मे पानी चालु किया है उस सार्वजानिक नलके से उनके घरों की दूरी गाँव के अन्य लोगों के घरों की अपेक्षा सबसे दूर है जहाँ से उन्हें गैलनो में पानी ढोते-ढोते लगभग दो वर्ष हो चुके है जिसके कारण उन्हें बड़ी कठिनाईयो का सामना करना पड़ रहा है I हैरानी की बात तो यह है कि गाँव के अन्य ग्रामीण (स्वर्ण जाति के) उस सार्वजनिक नलके से दिन और रात सीधे प्लास्टिक की पाइप लगाकर अपनी टंकीया और कई लोग टुल्लू पंप से छत पर रखी टंकिया में पानी भरते है I जब भी उस सार्वजानिक नलके से पीडित परिवार अपनी प्लास्टिक की पाइप लगानी चाही तो गाँव के कुछ लोग उन्हें वहां से पाइप नही लगाने देते है।
आरोप है की गाँव के तीन परिवार अनुसूचित जाति से है इसलिए उनके साथ भेदभाव किया जाता है और उनके साथ गाली गलोच सहित मार पीट तक उतारू हो जाते है। हालाँकि पीड़ित परिवारों ने जातिगत आधार पर हो रहे भेदभाव के बाद चार-पांच अनुसूचित जाति के परिवारो के लिये पृथक सार्वजानिक नल लगवाने के लिये प्रमुख अभियंता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग शिमला को दिनांक 31-08-2018, 22-11-2018, 24-01-2019 अधीक्षण अभियंता नाहन वृत को दिनांक 22-11-2018 , 21-01-2019 सहायक अभियंता राजगढ़ को दिनांक 21-01-2019, अधिशाषी अभियन्ता नौहराधर मंडल को दिनांक 21-01-2019 से अनुरोध कर चुके है लेकिन विभाग ने अभी तक उनकी समस्या के समाधान हेतु कोई कदम नही उठाए।

क्या कहते है आधिकारी

इस बारे जब अधिशाषी अभियंता नोहराधर मंडल अरशद रहमान से सिरमौर न्यूज़ ने बात की तो उनका जवाब सुनकर आप भी चौक जायेंगे। अरशद रहमान ने कहा की ” शिकायतकर्ता पूरी तरह से पागल हो गया है , अभी हम कुछ नहीं कर सकते एक और नई लाइन बिछाई जा रही है एक दो महीने बाद जेसे काम पूरा हो जायगा तब देख लेंगे।