धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित होगा पौड़ीवाला का प्राचीन शिव मंदिर -डॉ0 बिंदल

हिमाचल

सिरमौर न्यूज़ – नाहन

पौड़ीवाला स्थित प्राचीन शिव मंदिर को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटक इस स्थल पर पहूंचकर इस प्राचीन मंदिर में स्थित शिवलिंग के दर्शन के साथ साथ प्रकृति की अनुपम छटा का आन्नद भी ले सके । यह उदगार विधानसभा अध्यक्ष डॉ0 राजीव बिंदल ने सोमवार को शिवरात्रि के महान पर्व पर नाहन के समीप पौड़ीवाला के शिव मंदिर में पूजा अर्चना के उपरांत उपस्थित लोगों के साथ एक वार्ता के दौरान व्यक्त किए । उन्होने कहा कि पौड़ीवाला शिव मंदिर में स्थित स्वयंभू शिवलिंग का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा है और इसे स्वर्ग की दूसरी पौड़ी माना जाता है । जनश्रुति के अनुसार रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए शिव भोले भगवान की घोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को एक दिन में स्वर्ग के लिए पांच पौडियॉं निर्मित करने को कहा । शिव की आज्ञा से रावण ने पहली पौड़ी हरिद्वार में हर की पौडी, दूसरीं शिव मंदिर पौडी वाला, तीसरी चूडे़श्वर महादेव और चौथी पौड़ी किन्नर कैलाश पर्वत पर बना ली थी और कथानुसार इसके बाद रावण को नींद आ गई थी और जब वह जागे तो अगली सुबह हो चुकी थी। लोगों की मान्यता है कि पौड़ी वाला स्थित इस शिवलिंग के विशेषकर शिवरात्रि पर्व पर दर्शन करने से लोगों की सभी मनोकामनाऐं पूर्ण होती है।
डॉ0 बिंदल ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर के समीप सरकार द्वारा डेढ करोड़ की लागत से नेचर पार्क विकसित किया जा रहा है जिसमें पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं का सृजन करने की योजना है । उन्होने कहा कि जिला सिरमौर में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाऐं विद्यमान है और जिला में पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने के लिए एशियन विकास बैंक के माध्यम एक मास्टर प्लान तैयार किया गया है और जिला के प्रमुख प्राचीन धार्मिक स्थलों पर आधारित वैबसाईट तैयार की जाएगी । ताकि सिरमौर का भी कांगड़ा की तर्ज पर धार्मिक पर्यटन के रूप में विकास सुनिश्चित हो सके ।
डॉ0 बिंदल ने कहा कि सिरमौर टूरिस्ट सर्कट के अनुसार पर्यटक कालाअंब में प्रवेश करने पर वह सर्वप्रथम त्रिलोकपुर स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर के दर्शन के उपंरात सुकेती के फौसिल पार्क में स्थित सदियों पुराने जीवाश्मों को देख सकेगें । इसी प्रकार पांवटा का ऐतिहासिक गुरूद्वारा, पौड़ीवाला का शिव मंदिर , रेणुका झील व भगवान परशुराम मंदिर और हरिपुरधार का माता भंगायणी मंदिर इत्यादि के दर्शन के साथ साथ चूडधार व हिमालय की हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं का आन्नद भी उठा सकेगें ।
डॉ0 बिंदल ने इस अवसर पर लोगों को शिवरात्रि पर्व की शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि राज्य के लोग प्राचीन काल से इस त्योहार को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को भगवान शिव और शक्ति के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है और प्रदेश के विभिन्न जिलों में मनाए जाने वाले महाशिवरात्रि त्यौहार का अपना विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि मेला आपसी प्रेम व भाईचारे के रिश्ते को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।

इस मौके पर श्रीमती मधु बिंदल, पंचायत समिति अध्यक्षा कविता चौहान, जिला भाजपा मिडिया प्रभारी राकेश गर्ग, ओपी सैनी सहित भाजपा के अन्य पदाधिकारी इत्यादि उपस्थित थे । इससे पहले डॉ0 बिंदल ने रानीताल स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भी पूचा अर्चना की और मंदिर में फलाहार का प्रसाद ग्रहण किया ।