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वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ब्रिजेन्द्र कुमार पंचतत्वों में विलीन , बेटियों ने दी मुखाग्नि

हिमाचल

सिरमौर न्यूज़ – पांवटा साहिब

वक्त के साथ समाज की सोच भी बदल रही है। परंपराओं से हटकर पांवटा साहिब में दो बेटियों ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया। मृतक वरिष्ठ पत्रकार का कोई बेटा नहीं था बल्कि दो बेटियां थीं जिन्होंने बेटा बनकर हर फर्ज को पूरा किया
दरसल पांवटा साहिब के वरिष्ठ पत्रकार (60 वर्षिय) डॉ. ब्रिजेन्द्र कुमार का ह्रदय गति रुकने के कारण देहरादून के एक निजी अस्पताल में देहांत हो गया था। जिसके बाद उनकी दो बेटियो नेहा और श्वेता ने उनका अंतिम संस्कार किया। रविवार को पांवटा साहिब की यमुना नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया। पंजाब केसरी समाचार पत्र से पत्रकारिता क्षेत्र में अपने जीवन के 35 वर्ष बिताने वाले डॉ. ब्रिजेन्द्र की पत्नी का देहांत पहली ही हो चूका था लेकिन उन्होंने बेटियों को पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया। एक बेटी दन्त चिकित्सा की ( डेंटिस्ट डॉक्टर ) पढाई कर चुकी है तो दूसरी ने बकालत की है। रूढ़िवादी परंपराओं के बंधन को तोड़ते हुए दोनों बेटियों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उन्होंने बेटा बनकर हर फर्ज को पूरा किया। अंतिम संस्कार में वह रोती रही, पापा को याद करती रही, लेकिन बेटे की कमी को हर तरह से पूरा किया। अंतिम संस्कार के मोके पर मीडिया से लेकर नेतागण व् समाज के विविन्न वर्ग के लोग अंतिम संस्कार में पहुंचे थे जिनके सामने दोनों बेटियों ने बिना बोले ही समाज को बड़ा सन्देश दिया।समाज बदल रहा है , बेटे की चाह में बेटियों को कोख में मारने वाले लोगो के लिए पांवटा साहिब में दो बेटियों ने सन्देश दिया है।

” बेटी है अनमोल “