पदमश्री से नवाज़े जायेंगे सिरमौर जिला के डॉ. जगतराम

हिमाचल

पवन तोमर/राजगढ़

यह सम्मान मेरा नहीं बल्कि देश की समस्त जनता का है जिनकी बदोलत मुझे यह सम्मान मिलने जा रहा है। इस सम्मान के लिए भारत सरकार व् देश की जनता का धन्यवाद करता हूँ क्यूंकि करोड़ो लोगो में मुझे इस काबिल समझा ,कार्य तो हम करते ही है लेकिन ऐसे सम्मान के बाद मुझे कार्य करने की शक्ति और जायदा मिल गई है ” – ये कहना है डॉ. जगत राम का।
जिला सिरमौर से ताल्लुख रखने वाले डॉ. जगत राम आज के समय में किसी पहचान के मोहताज़ नहीं है। हिमाचल व् भारत ही नहीं बल्कि डॉ. जगत राम विश्व स्तर पर भी कीर्तिमान हासिल कर चुके है। जिसके चलते उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाज़ा जा रहा है। एक साधारण से परिवार से निकले डॉ. जगत राम से सिरमौर न्यूज़ ने ख़ास बातचीत की जिसमे उन्होंने अपने विचारों को साँझा किया।

डॉ जगत राम ने बताया की “पीजीआई में उन्हें 2019 तक करीब 39 साल से जायदा का समय हो चुका है जिसमे नेत्र विशेषज्ञ के तौर पर छोटे बच्चो में सफ़ेद मोतिया के अभी तक 10 हजार से जायदा सफल ऑपरेशन व् व्यस्क के एक लाख के करीब सफल ऑपरेशन किये जा चुके है। उन्होंने बताया की 25 साल तक उन्होंने चेरिटेबल ट्रस्ट ब्यास के लिय भी अपनी सेवाए दी है। जो ओपरेशन आज तक दुनिया में नहीं हुए थे 2013-16 -18 में उन्हें चार मरतबा अमेरिका में ऐसे ऑपरेशन करने के लिए अव्वल चुना गया था साथ ही ब्रिसलाना स्पेन न्यू सर्जिकल के लिय भी समानित किया गया था व् उनके सम्मान के लिए भारत का राष्ट्रियगान बजाया गया था जोकि बड़े गर्व की बात थी”

जिला सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र रहनेवाले है डॉ. जगत

बताते चले की सिरमौर जिला के राजगढ़ के समीप पबियाना के साथ लगते छोटे से गांव पटाड़िया में 17 अक्तूबर, 1956 को डा0 जगत राम का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ । इनके पिता ध्यानूराम पेशे से एक किसान है, जिन्होने निर्धनता की विपरित परिस्थितियों के बावजूद भी डा0 जगत राम को कभी भी आगे बढ़ने से नहीं रोका । डा0 जगत राम अपने दस भाई बहनों में दूसरे स्थान पर हैं, इनके अतिरिक्त पांच भाई और चार बहनें हैं । इन्होने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव के स्कूल पबियाना में और उच्च शिक्षा राजगढ़ से हासिल की थी । उसके उपरांत उन्होने सोलन से प्रेप की तत्पश्चात इनका चयन एमबीबीएस के लिए स्लोडन अस्पताल शिमला के लिए हुआ जिसे वर्तमान मेें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता है । वर्ष 1979 में डा0 जगतराम द्वारा पीजीआई में एमडी करने के लिए प्रवेश लिया और 1982 में नेत्र विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाऐं पीजीआई में देनी आरंभ की और आज इसी संस्थान के उस मुकाम पर इन्होने दस्तक दी है जहां तक बहुत कम लोग पहूंच सकते है ।
डा0 जगत राम ने पीजीआई में विभिन्न पदों रहकर अपनी सेवाऐं दी है । निदेशक के पद पर आसीन होने से पूर्व डा0 जगतराम पीजीआई के नेत्र विज्ञान विभाग में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे ,इस दौरान इन्हें नेत्र विशेषज्ञ में प्रवीणता एंव योग्यता के आधार पर राष्ट्रीय एवं अर्न्राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों बार सम्मानित भी किया गया । इनके द्वारा अबतक 32 शोधपत्र भी लिखे जा चुके हैं, जिसके लिए इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया । देश के लिए यह गौरव का विषय हैं कि मोतियाबिंद एवं अपवर्तक सर्जरी सोसायटी ऑफ अमेरिका द्वारा वर्ष 2016 के वार्षिक सम्मेलन के अवसर पर प्रो0 डेविड आर हरडेंट द्वारा दूसरी बार डा0 जगत राम को बेस्ट ऑफ द बेस्ट अवार्ड से विभूषित किया गया था ।

अपने पूज्य माता-पिता को देते है अपनी सफलता का श्रेय

अपने अनुभवों को सांझा करते हुए डा0 जगतराम अपनी सफलता का श्रेय अपने पूज्य माता-पिता को देते हैं, जिन्होने विपरित परिस्थितियों के बावजूद भी उन्हें इस मुकाम तक पहूंचाया है । उनका कहना है कि अतीत में लोगों के पास आय के कोई ठोस साधन नहीं थे, केवल पांरपरिक कृषि पर निर्भरता थी । इसके अतिरिक्त शिक्षा के साधन भी सीमित थे । उन्होने कहा कि प्रशिक्षण दौरान भी उन्हें काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, परन्तु अपने डाक्टर बनने के सपने को चूर नहीं होने दिया । भाग्य विडंबना है कि जिस पीजीआई के बाहर खुले मैदान में एमडी की परिक्षा देने के दौरान रात गुजारी थी आज डॉ. जगतराम उसी संस्थान के प्रमुख है व् पदमश्री के लिय चुने गये है ।