4G तो छोड़िये यहाँ आधा किलोमीटर दूर जाकर मिलता है सिग्नल

समस्या हिमाचल

पवन तोमर / राजगढ़

डिजिटल इंडिया बनाने के देश में होड़ लगी है , डिजिटल इंडिया के सपने संजोए ग्रामीण भारत भी इसी दौड़ में है लेकिन ग्रामीण भारत के कुछ ऐसे गाँव भी है जो आज तक दूरसंचार की आवश्यक तकनीक से पूरी तरह से नहीं जुड़ पाए हैं। उपतहसील धामला क्षेत्र भी उसी ग्रामीण भारत का हिंसा है जहाँ 4G तो छोड़िये बात करने के लिए सिग्नल ढूंढना पड़ता है। अभी तक यहाँ का आधा क्षेत्र इंटरनेट और मोबाईल फोन सेवा से महरूम है जिसके चलते यहां के ग्रामीण इस जरूरी सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इस बारे में स्थानीय उपभोक्ता सुशील बरशांटा ने बताया कि इंटरनेट सुविधा तो छोड़िए अभी तक फोन करने के लिए भी हमें आधा किलोमीटर दूर जा कर फोन करना पड़ता है जहां बीएसएनएल का थोडा़ बहुत सिगनल मिलता है। बरशांटा ने बताया कि इस क्षेत्र के लगभग दो दर्जन गांव अभी तक किसी भी नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं जिनमें उलख, कतोगा, शाड़, पजेवगा, कुम्हारला, ठंडीधार, बेड़, जमोली, ग्लोग, शकैण, घणोटी, सरबा, नेहरटी, बघोट इत्यादि गांव शामिल हैं। इसी संदर्भ में सुनील, धर्मपाल, श्यामसिंह, केवलराम, रमेश ने भी मोबाईल नेटवर्क के न होने की बात कही तथा कहा कि यहां जिओ नेटवर्क टावर का कार्य आरंभ हुआ है जिसे लगाते हुए एक वर्ष हो चुका है परन्तु अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। गति इतनी धीमी है कि काम पूरा होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इस बारे में स्थानीय उपभोगता सुशील बरशांटा ने बताया कि वे कई बार जिओ कंपनी के कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं जो हरबार आश्वासन दे कर हमें संतुष्ट करवाते रहते हैं। इसके अतिरिक्त वे बीएसएनएल विभाग से भी मिले परन्तु वे भी वादा करके टालते रहे हैं। हालाँकि डिजिटल इंडिया बनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित कर करोडो रूपया पानी की तरह बहाया जा रहा है लेकिन धामला क्षेत्र आज भी दूरसंचार से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया। ग्रामीणों ने सरकार से अनुरोध किया है कि या तो बीएसएनएल के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को जोड़ा जाए अथवा निजि कंपनी को जल्दी से जल्दी टावर लगाने के लिए दबाव डाला जाए।