दुर्दशा का शिकार होता जा रहा पांवटा साहिब का किसान भवन

स्वछता हिमाचल

पांवटा साहिब में किसानों के लिए बनाया गया किसान भवन दुर्दशा का शिकार हो गया है।  समय से मुरम्मत न हो पाने के कारण भवन खंडहर में तबदील होता जा रहा है लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा जिसके चलते यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
दुर्गम क्षेत्रो से पांवटा साहिब पहुँचने वाले किसानों के लिए निर्मित किसान भवन खंडहर में तब्दील होने के कगार पर है। 1976 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ यशवंत सिंह परमार ने एसएफडीए द्वारा निर्मित किसान भवन का उद्घाटन किया था। सूत्र बताते है की इस भवन में एक बार हिमाचल केबिनेट की बैठक तक हो चुकी है। लेकिन आज ये भवन लापरवाही के चलते दुर्दशा का शिकार हो गया है लेकिन सम्बंधित विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इस और कोई ध्यान ही नहीं दे रहे है। कुछ वर्ष पूर्व इसकी मुरम्मत के नाम पर साढ़े चार लाख की राशि भी ख़र्च की जा चुकी है लेकिन भवन में किसी तरह का सुधार नहीं किया गया। इतना ही नहीं एसएफडीए भवन के साथ किसानो के लिए बना एक अन्य भवन समय से पहले ही खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस असुरक्षित भवन को अभी तक गिराया नहीं गया है जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है. किसान भवन में इस्तेमाल किया गए लोहे के सरिये व अन्य सामान जंग खा चुका है जिसके कारण अब इस भवन की मजबूती भी ख़त्म होती जा रही है , इसी भवन में कुछ कार्यालय भी चल रहे है जहाँ काम करने वाले लोगो की जान के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है . स्थानीय अधिकारी कई बार इस बारे अपने बड़े अधिकारियों को लिख चुके है लेकिन किसी तरह का सहयोग नहीं मिल पाया।