पांवटा का हेमंत बना लावारिस लाशों का तारनहार

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सजीव समाज की सेवा तो कई लोग करते हैं, लेकिन निस्वार्थ भावना से लावारिस मृतकों के काम शायद ही कोई आता हो। ऐसा पुनीत काम करने वाले कहीं बिरले ही नजर आते हैं। जिला सिरमौर के पांवटा साहिब का एक युवक हेमंत शर्मा लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर समाज में एक अलग ही उदहारण बन गया है। हेमन्त शर्मा पिछले कई सालों से निःशुल्क यह पुनीत कार्य कर रहे हैं। हेमंत शर्मा अभी तक 14 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं और इसका सारा खर्च हेमंत अपनी जेब से चुकाते हैं। आज ऐसे ही एक शख्स से हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं।
कैसे मिली प्रेरणा……..
हर कार्य में कुछ प्राप्ति की कामना करने वालों के समाज में हेमंत के भीतर ऐसी सोंच कहा से आई। यह जनना भी बेहद रोचक है। हेमंत ने इस विषय में बताया कि श्मशान में किसी के अंतिम संस्कार के दौरान उसके मन में सवाल कौंधा की जिनका कोई अपना नहीँ होता उनका अंतिम संस्कार कोन करता होगा। कुछ वर्ष पहले पांवटा साहिब स्थित शमशान घाट में वे किसी के अंतिम संस्कार में गये हुए थे, पास में ही एक लावारिस लाश का संसकार किया गया था जिसकी सुध लेने 4-5 दिनों से कोई नहीं आया था। जिसे देखकर हेमंत के दिल को धक्का लगा और उन्होंने फैसला लिया कि अब से वे इस कार्य को करेंगे। सवाल केवल अंतिम संस्कार तक का नहीं था, बल्कि बिधिवत अंतिम संस्कार की क्रिया को अपनों की तरह पूर्ण जिम्मेदारी से निभाने का था। हेमंत ने फैसला लिया कि अब क्षेत्र में मिलने वाली हर लावारिस लाश का अंतिम संस्कार वो खुद करेगा।
अकेला चला था, कारवां जुड गया……………
आज के इस दौर में जहाँ लोग अपनों का अंतिम संस्कर करने से भी कतराते है, वहीँ हेमंत शर्मा पिछले कई सलों से लावारिश लाशों के विधिवत अंतिम संस्कार का कार्य कर रहे है। अब तक हेमंत 14 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। कुछ अरसा पहले हेमंत अकेले ही इस काम को अंजाम देते थे। लेकिन कुछ अन्य लोग हेमंत से प्रेरणा ले कर अब उसके साथ जुड़ गए है और लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार में हेमंत की पूर्ण सहायता करते हैं। हेमंत के साथ जुड़े पवन कुमार व अफलातून आदि ने बताया कि उन्हें फेसबुक के माध्ययम से हेमंत के इस पुनित कार्य के बारे में पता चला और वे हेमंत से प्रेरित होकर उनके साथ जुड़ गए।