मैनकाईंड उद्योग खुले में डाल रहा गंदगी, बीमारियां फैलने का खतरा, पर्यावरण विभाग बेखबर

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देश की अग्रणी दवा निर्माता कंपनी मैनकाईंड द्वारा खुले आम बिना ट्रीट किया हुआ गन्दा पानी खुले खेतो में छोडा जा रहा है जिससे सैकडों बीघा भूमि बंजर होने के कगार पर पहुंच गयी है। वही दूसरी ओर कम्पनी प्रबन्धन साथ लगते पानी के खाले में कम्पनी का कचरा जला रहा है जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और भीषण बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो रहा है। इसके बावजूद भी पर्यावरण विभाग मात्र औपचारिकता कर कम्पनी प्रबन्धकों की चापलूसी में मस्त है। ग्रामीणों द्वारा कई बार इस संबंध में प्रदूषण विभाग के आला अधिकारियों से शिकायत की गई परंतु सम्बन्धित विभागों की बेपरवाही के कारण आजतक इसपर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

जिम्मेदार विभागों के ढुलमुल रवैया के चलते हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर की दवा निर्माता कंपनियां भी प्रदूषण के मामले में गंभीर नजर नहीँ आ रही है। पांवटा साहिब के ग्राम किशनपुरा में स्थित मैंनकाइंड फार्मा के प्लांट से बिना साफ किया पानी नाले में छोड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। जिसके बाद रोज़ाना सुबह-शाम यह दवाओं का दूषित पानी आसपास के निजी खेतों में जाता है और इसमें से कुछ पानी पास से गुज़र रहे बरसाती खाले (पानी के नाले) मे छोडा जाता है। जिसके कारण यहां गहन बदबू फैल रही है जिससे ग्रामीणों का यहां से गुज़रना और अपने खेतों में काम करना दूभर हो गया है। इसके साथ ही दिन-बर-दिन इससे प्रभावित खेत भी कैमिकल युक्त पानी से बंजर होते जा रहे हैं। यहां के खाले में पानी भी प्रतिदिन इस गंदे पानी व जले हुए कचरे से दूषित हो रहा है। जो पानी कभी खेतों में सिंचाई के काम आता था वह अब दूषित हिने के कारण मच्छरों और बीमारियों का घर बन रहा है। जिससे आस-पास के लोगों सहित पशु-पक्षी भी लगातार बीमार हो रहे हैं। इतना ही नहीं आगे जाकर यही खाले का दूषित पानी बाता नदी और उससे आगे जाकर बाता नदी पवित्र यमुना नदी में मिलता है जोकि उन्हें भी दूषित अर रहा है।
स्थानीय निवासी शमशेर सिंह, जसमिंदर, रघुबीर सिंह, ओम प्रकाश, जीवन सिंह, मुकेश कुमार, रामपाल, यशपाल चौधरी, राकेश आदि ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में प्रदूषण विभाग के आला अधिकारियों से भी कई बार शिकायत भी की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से खेतों व पास से बह रहे नाले में जो पानी छोड़ा जा रहा है, उसमे केमिकल मिले हुए हैं। यह पानी बिना ट्रीट किए नाले और खेतों में छोड़ा जा रहा है। जिससे उनके सैंकडों बीघा खेत बंजर हो रहे हैं और साथ ही भीषण बीमारियों के कारण ग्रामीणों सहित उनके पशु भी बीमार पड रहे हैं। साथ ही इस गन्दे पानी से फैली बदबू ने उनका यहां जीना दूभर कर दिया है। इस दूषित कैमिकल युक्त पानी से लोगो के खेतों की मिट्टी व यहां पडे पत्थरों का रंग भी बदल चुका है। दिन-प्रतिदिन ग्रामीणों का यहां जीवन मुश्किल होता जा रहा है परंतु सुस्त पर्यावरन विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। हर बार शिकायत किये जाने पर पर्यावरण विभाग मामले को टालता नज़र आता है।
उधर इस बारे पूछे जाने पर वरिष्ठ अभियंता प्रदूषण नियंत्रण विभाग श्रवण कुमार ने बताया कि बीते बुधवार को उन्हें ग्रामीणों द्वारा इसकी मौखिक शिकायत प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि जब लिखित शिकायत प्राप्त होगी तो टीम मौके पर भेजकर उचित कार्यवाही करी जायेगी।