राजगढ़ के सार्थक ने नन्ही उम्र में तबला बजाने का सिखा हुनर

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सिरमौर न्यूज। राजगढ़
मात्र तीन साल की उम्र में तबला बजाकर पूरे देश में अपना नाम चमकाने वाले सार्थक ने एक बार दूबरा अपना व अपने प्रदेश का नाम रोशन किया है। जी हां हम बात कर रहे है, उपमंडल राजगढ़ के 7 वर्षीय बेटे सार्थक बरशांटा की। हाल ही में सार्थक का चयन बालीवूड फिल्म हुन्नर के लिए हो गया है सार्थक के पिता अमर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया की सार्थक 26 अप्रैल को राजगढ़ से लुधियाना के लिए जाएगा क्यूकि फिल्म की शूटिंग 27 अप्रेल से शुरू होनी है। इस बारे फिल्म निदेशक वरुण बंसल व् उनकी पत्नि मिनाक्षी बंसल ने फोन पर बताया की भगवान ने जिला सिरमौर राजगढ़ के रहने वाले सार्थक को एक अद्बुत कला से नवाजा है सार्थक तबला, ढोलक बजाने के साथ साथ गाना भी गाता है यूँ कहना गलत नहीं होगा की सार्थक ने अभी से संगीत को अपने दिलो व् दिमाग में पूरी तरह से बसा लिया है उसके लिय अपनी संगीत ही सब कुछ है उसे जब भी देखा गया है तो वह हमेशा या तो कुछ बजता रहता है या अपने आप में गुनगुनाता रहता है। उपरोक्त फिल्म निदेशक ने बताया की सार्थक को फिल्म में काम करने के लिय 27 अप्रेल को बुलाया गया है।
गोरतलब रहे की सार्थक ने हिमाचल प्रदेश का नाम पूरे उत्तर भारत में रोशन किया है। इससे पहले सार्थक रियाल्टी शो किसमे कितना है दम का चौंपियन बन चूका है। शो के फाइनल राउंड में पूरे उत्तर भारत के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए इस नन्हे बेटे ने शो का विजेता बनकर न केवल सिरमौर, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। इस शो में सार्थक ने ढोलक की थाप पर गायकी के ऐसे सुर छेड़े कि अच्छे-अच्छे प्रतिभागियों को धूल चटाते हुए शो का खिताब अपने नाम कर लिया था। उपमंडल राजगढ़ के गुरू पीच वैली इंटरनेशनल स्कूल में चोथी कक्षा में पढ़ने वाले सार्थक की कामयाबी से पूरे राजगढ़ क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। इसके साथ ही उसके घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। राजगढ़ के अमर सिंह व आशा देवी के घर में जन्मा यह होनहार लाडला अब तक करीब 70 छोटे-बड़े स्टेज पर अपनी प्रतिभा का हुनर दिखा जा चुका है। उधर इस बारे सार्थक के पिता अमर सिंह ने खुशी जताते हुए सार्थक की कामयाबी का श्रेय उसके गुरू जियालाल ठाकुर व स्कूल के अध्यापकों को दिया है। इस बार जब सार्थक के पिता अमर सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया की सार्थक मात्र तीन साल की उम्र में अपने घर पर खिड़कियाँ, दरवाजे बजाता रहता था, कभी कभी तो जिस थाली में खाना खाता था उसे भी बजाना शुरू कर देता था। जब घर वालांे ने उसे एक ढोलक दी तो उसने मात्र तीन साल की उम्र में बजानी शुरू कर दी। उसके बाद सार्थक के घरवालो ने उसकी और ध्यान देना शुरू किया।
क्या कहते है सार्थक के माता -पिता
मिडिया द्वारा जब इस बारे पूछा गया तो उन्होंने बताया की राजगढ़ में संगीत सिखने के लिय कोई भी सरकारी व् निजी संसथान नहीं है। जिससे सार्थक को काफी समस्या का सामना करना पड़ा। पिता अमर सिंह ने बताया की वह सार्थक को हर रविवार को सोलन अपनी गाड़ी में ले जाते रहे है और अभी भी सोलन को ले जाते है आने दृजाने में पूरा सो किलो मीटर का सफर तय करने के बाद सार्थक अपने घर पहुचता है। सार्थक अपने घर में रोज एक घंटे रियाज करता है उसके पिता अमर सिंह ने उसके लिए संगीत का जरुरी सामान घर पर रख दिया है। सार्थक के पिता अमर सिंह ने बताया कि अगर राजगढ़ में कोई संगीत सिखाने वाला मिल जाए तो सार्थक के साथ साथ दूसरे संगीत प्रेमी को संगीत व् अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने आसानी से ला सकते है।