घुमन्तू भेड़ बकरी पालकों की सांस्कृतिक विरासत पर प्रशिक्षण कार्यशाला

लेटेस्ट न्यूज़

सिरमौर न्यूज। राजगढ़
पझौता क्षेत्र के जालग की सूरमय घाटी में आसरा संस्था के तत्वाधन में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से हुआ। संस्था की सचिव हेमलता और प्रवक्ता रामलाल ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सिरमौर का गिरीपार हाटी क्षेत्रा सदियों से सांस्कृतिक ध्रोहर का अमूल्य खजाना विरासत में संजोए है। यहां की बहुरंगी संस्कृति युगों की सम्पदा यहां के रीति-रिवाज खान-पान लोक नृत्य, लोक नाट्य, मन्दिरों की आस्था से आज तक यथावत संजोए रखे है लेकिन इस क्षेत्रा के बहुत से भाग में आज भी सेंकड़ो परिवार घुमन्तू भेड़-बकरी पालक है जो गर्मियों में चूड़धर के जंगलों में और सर्दियों में गर्म इलाके नोइड़े को जाते हैं। इनकी अपनी संस्कृति व पहचान है। आसरा संस्था ने संस्कृति के विद्वान शोध्कर्ताओं व लोक संगीत के गायकों व बजूर्ग विद्वान अनुभवी देवपरम्परा से जूड़े लोगों तथा जन-जन से सम्पर्क साध्ने के बाद सभी तथ्य को जोड़ कर इन भेड़-बकरी पालकों के लोक नाट्य स्वांगटू व रहन-सहन खान-पान रीति-रिवाजों का विश्लेषणात्मक अध्ययन करने के बाद एक तथ्यपूर्ण सामग्री का संकलन किया है। फलस्वरूप आज से युवा कलाकारों को नृत्य गायन अभिनय से सम्बन्ध्ति लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यशाला युवाओं को अतीत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करवाएगी तथा लोक गायन वादन अभिनय के अनुभवी कलाकारों द्वारा इन्हैं प्रशिक्षण देना पहला कार्य होगा। परिधनों का निर्माण जिसमें मौलिकता की अभिव्यंजना हो तथा लोक गायकों के द्वारा भड़ालों की पारंपरिक जीवन शैली तथा उस समय की समाजिक व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी जाएगी। इस कार्यशाला मैं तैयार किया गया कार्यक्रम विभिन्न गांवों, स्कूलों में प्रस्तुत करके तथा स्ट्रीट शों के द्वारा जनसमूह के प्रदर्शन किए जाएगें ताकि कार्यशाला में शोध् प्रशिक्षण के बाद जो कलाकारों ने प्रस्तुतियां तैयार की हे उसका सार्वजनिक रूप प्रचार प्रसार हो। इन भेड़ बकरी पालकों के पुरखों ने ये अमुल्य संस्कृति जंगलों में रहकर पीढ़ी दर पीढ़ी पाली-पोसी है तथा आज तक सहेज कर रखी है। कुछ दशकों से पाश्चात्य प्रभाव तथा रूपहले पर्दे की मलीन छाया ने सांस्कृतिक परिदृश्य कलुषित किया है।

आसरा ने ये सभी सार्थक कदम अनादिकालीन संस्कृति को सहेजने के लिए उठाकर एक पहल की है। यंे घुमन्तु जीवन जोे हाटी शैली का भी आधर है और कार्यशाला के परिणामों से सही राह पर संस्कृति को ले जाने में सफल हो पाएगा। आयोजन के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित विद्यानन्द सरैक ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यशाला का शुभारम्भ किया और कलाकारों से आवाह्न किया कि हमारी इस सम्पदा को हम आप लोगों ने दर्शकों के आर्शिवाद से संवरना और सहेजना है तथा इसकी मौलिकता को सही अन्जाम देना हे क्यौंकि ये घुमन्तू जीवन बसर करने वाले ये भेड़ पालक हमारी संस्कृति के सूत्राधर हैं। आसरा का ये प्रयास प्रशंसनीय है और आप सभी कलाकारों की मेहनत से इसमें कामयाबी होगी जो राष्ट्र के निर्माण मे महान् योगदान है। मंच का संचालन संस्था के प्रवक्ता रामलाल ने किया जबकि क्षेत्रा की कुछ विशेष संस्थाओं के विशिष्ट अतिथियों के साथ कई प्रतिष्ठित विद्वानों और कलाकारों ने भाग लिया।