बडू साहिब इटरनल विश्वविद्यालय में कृषि मेले का आयोजन

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सिरमौर न्यूज। राजगढ़
बडू साहिब में इटरनल विश्वविद्यालय के कृषि कालेज द्वारा दो दिवसीय किसान मेला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर यहां किसानों की जानकारी हेतु विभिन्न कृषि औजार व यंत्र बनाने वाली कंपनियों के द्वारा प्रदर्शनियां भी लगाई गई। इस दौरान विभिन्न राज्यों, खासकर पंजाब एवं हिमाचल के किसानों द्वारा कृषि यंत्रों तथा बीजों के बारे में जानकारी जुटाई गई। लगभग दो दर्जन स्टालों में, विभिन्न जानकारी मुहैया करवाई जा रही थी। पहले स्टाल में गेहूं के शोध छात्राओं ने गेहूं ,मक्का की विभिन्न किस्मों के बारे व उनके गुणवत्ता के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हुए कहा कि गेहूं का इतिहास 12 लाख वर्ष पुराना है उस वक्त गेहूं में दाने नहीं होते थे बल्कि घास नुमा शक्ल में था, इसमें कुदरती तौर पर बदलाव हुआ और हल्के-हल्के दाने भी लगने लगे। तनवीर कौर, शिवानी ठाकुर, गीतिका गुलेरिया, अम्बिका शर्मा ने बताया कि फिर इंसानों द्वारा गेहूं की खेती शुरू की गई व आज के समय मे हमे इसके अच्छे परिणाम भी मिल रहे हैं। इन छात्राओं ने 12 लाख वर्ष पूर्व जंगली घास नुमा गेहूं भी दिखाई जो कि इटरनल विश्वविद्यालय के प्रायोगिक खेत मे उगाई गयी है। छात्राओं ने बताया कि वर्तमान गेहूं को इटरनल विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ एच एस धालीवाल जिंक व आयरन युक्त बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि लोगों को एनीमिया रोग से भी मुक्ति दिलाई जा सके। विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग ने मधुमक्खी पालन द्वारा शहद उत्पादन व गुणवत्ता बारे जानकारी बांटी। जबकि ‘फ़ूड टेक’ के छात्रों द्वारा मल्टीग्रेन दलिया का प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय के पब्लिक हेल्थ विभाग ने आमजन को उत्तम स्वास्थ्य की देखभाल बारे जानकारी दी। किसान मेले में विशेष रूप से वनस्पति विभाग द्वारा औषधीय एवं प्राकृतिक पौधों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वनस्पति विभाग के डॉ0 विवेक शर्मा ने बताया की उन्होंने उपकुलपति डॉ एच एस धालीवाल के दिशा निर्देश में गेहूं की कोंपलों के रस के कैप्सूल एवं जूस जीवो केनोला के साथ मिलकर मार्किट में उतारा है। अक्षय ऊर्जा विभाग से भी एक स्टाल लगाया गया था। इसमें प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों का सदुपयोग, कृषि व मानव जीवन के विभिन्न आयामों में उपयोगिता की जानकारी दी गई।