पिंकी रमौल का शोध पत्र इंडियन इकोनॉमिक जर्नल में होगा प्रकाशित

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सिरमौर न्यूज़/ पांवटा साहिब

त्रिवेणी स्कूल ऑफ एक्सीलेंस पांवटा साहिब की प्रिंसिपल पिंकी रमौल का शोध पत्र “इंडस्ट्रियल लोकेशन पॉलिसी इन इंडिया: एन एनालिटिकल पर्सपेक्टिव” अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशक सेज पब्लिकेशन द्वारा इंडियन इकोनॉमिक जर्नल में प्रकाशित होगा। पिंकी रमौल द्वारा इस शोध पत्र में स्वतंत्रता के बाद से भारत में औद्योगिक स्थान नीति का अवलोकन किया गया है। 1991 के आर्थिक सुधारों व नई आर्थिक नीति से पूर्व भारत में औद्योगिक स्थान नीति के अंतर्गत औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों की पहचान कर लक्षित हस्तक्षेप और विनियामक उपाय लागू किए जाते थे ताकि क्षेत्रीय समानता का उद्देश्य प्राप्त किया जा सके। परन्तु आर्थिक सुधारों के तत्पश्चात उदारीकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत सरकार की औद्योगिक मालिक और स्थान नियामक के रूप में भूमिका कम हो गई है जिसके परिणाम स्वरूप औद्योगिक स्थान नीति की प्रभावशीलता और दक्षता सीमित हो गई है। इस कारण यह नीति एक लक्षित दृष्टिकोण और उप-राष्ट्रीय रणनीतियों में स्थानांतरित हो गई है। एक ओर औद्योगिक विकास के लिए विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन संचालित किये गए जिसके तहत विशेष औद्योगिक पैकेज लागू किये गए, वहीं दूसरी ओर अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के लिए एक क्लस्टर विकास दृष्टिकोण अपनाया गया। परन्तु औद्योगिक स्थान नीति में अनेक उपायों के प्रयोग के बावजूद, परिधीय इलाकों में औद्योगिक पिछड़ापन अभी तक कायम है। निजीकरण एवं उदारीकरण के युग में लगातार बढ़ रही क्षेत्रीय असमानता एक गंभीर चिंता का विषय है। वास्तव में, औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्यों में सफल सतत औद्योगिकीकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रत्यक्ष हस्तक्षेप आवश्यक है, तथा साथ ही औद्योगिक पिछड़ेपन की समस्या के समाधान के लिए न केवल अच्छी नीतियां बल्कि प्रभावी कार्यान्वयन भी आवश्यक है।